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Bundel khand Ka Senapati- Mahal
Bundel khand Ka Senapati- Mahal

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बुन्देल खण्ड
का
सेनापति- महल

अपनी बात
यथा नदीना बहवोडम्बु वेगाः समुद्रमेवाभिमुखा द्रवन्ति।
तथा तवामी नरलोक ‘वीरा’, विशन्ति वकत्राण्यभिवि ज्वलन्ति।।

जैसे अनेक नदियों के जल-प्रवाह समुद्र की ओर दौड़तें है, वैसे ही संसार के समस्त शूरवीर मनुष्यों के समुदाय अहनिशि ‘मृत्यु की ओर -। तो उसके मन मंे एक अच्छा विचार आया कि ‘वह भी लिखे अपनी मातृभाषा, राष्ट्रगान हिन्दी मंे, हिन्दी- साहित्य और अपनी स्वतन्त्र शैली की ‘शक्ति का प्रभाव परखने के लिये। अपने गांव कुलपहाड़ के ‘सेनापति-महल’ और बुन्देलखण्ड के ऐतिहासिक पृष्ठ-भूमि के परिपेक्ष्य में।

Publisher : Onlinegatha

Edition : 1

Number of Pages : 77

Binding Type : Paperback

Paper Type : Cream Paper(58 GSM)

Language : Hindi

Category : HISTORY & POLITICS

Uploaded On : June 25,2016

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